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मछली इमल्शन उर्वरक-पौधों के लिए

मछली इमल्शन उर्वरक-पौधों के लिए

मछली इमल्शन उर्वरक एक जैविक उद्यान उर्वरक है, जो पूरी मछली या मछली के कुछ हिस्सों से बनता है। यह उर्वरक एन.पी.के का 4-1-1 का अनुपात प्रदान करता है। इसमें उपस्थित नाइट्रोजन को त्वरित नाइट्रोजन के रूप बढ़ावा देने के लिए इसे अक्सर फोलिअर-स्प्रे के रूप में उपयोग किया जाता है।

घर का बना मछली इमल्शन उर्वरक:-

घर पर मछली इमल्शन उर्वरक बनाना एक कठिन काम की तरह लग सकता है; जब तक कि, इसकी गंध अच्छी तरह से उस लायक न हो जाए। घर पर बना मछली इमल्शन, वाणिज्यिक इमल्शन की तुलना में सस्ता होता है, और आप एक ही समय में इसका एक बड़ा जत्था बना सकते हैं। घर के बने पायस में पोषक तत्व भी पर्याप्त रूप में होते हैं, जो व्यावसायिक रूप से उपलब्ध उत्पादों में नहीं होते हैं, क्योंकि व्यावसायिक मछली इमल्शन उर्वरक मछली के कचरे वाले भागों से बना होता है, न कि पूरी मछली से, जिसमें कम मात्रा में प्रोटीन, कम मात्रा में तेल, और कम मात्रा में हड्डी उपलब्ध होता है। घर के बने मछली इमल्शन उर्वरक के लाभ इसको और भी ज्यादा आश्चर्यजनक बना देता है। मिट्टी की सेहत के लिए, तप्त खाद और रोग नियंत्रण के लिए बैक्टीरिया और कवक का होना आवश्यक होता है। घर के पर बने इमल्शन उर्वरक में बहुत सारे सूक्ष्मजीव जीवाणु होते हैं जबकि वाणिज्यिक इमल्शन उर्वरक में कुछ ही सूक्ष्मजीव जीवाणु उपस्थित होते हैं, यदि उसमें कोई सूक्ष्मजीव हो तो ।

बनाने की विधि:-

ताजा मछली इमल्शन उर्वरक मिश्रण को आसानी से बनाने के लिए एक भाग ताज़ी मछली, तीन भाग बुरादा और एक बोतल सल्फर मुक्त गुड़ का शीरा मिलाया जाता है। आमतौर पर इसमें थोड़ा पानी मिलाना आवश्यक होता है। इस मिश्रण को ढक्कन वाले एक बड़े कंटेनर में रखा जाता है। लगभग दो सप्ताह तक इस मिश्रण को अच्छी तरह हिलाया और घुमाया जाता है, जब तक मछली अच्छी तरह टूट न जाए।

मछली इमल्शन  उर्वरक का उपयोग कैसे करें:-

पौधों पर मछली के इमल्शन उर्वरक का उपयोग करना एक सरल प्रक्रिया है। मछली के इमल्शन उर्वरक को हमेशा पानी से पतला करना पड़ता है। इसका सामान्य अनुपात बनाने के लिए 1 बड़ा चम्मच मछली इमल्शन उर्वरक और 1 गैलन पानी होना चाहिए। इस बने हुए मिश्रण को एक छिड़काव करने वाली बोतल में डालें और फिर सीधे पौधे की पत्तियों पर छिड़काव करें। पौधों के आधार के आसपास भी पतला मछली का इमल्शन उर्वरक डाला जा सकता है। निषेचन के बाद पानी देने पर पौधों को पूरी तरह से इमल्शन उर्वरक लेने में मदद मिलेगी।

Poonam Singh

Poonam Singh

Poonam Singh

Poonam Singh, M.Sc.(Bio-Chemistry), Content writer, Self Shiksha, Lcoatips, Candidviews, Quikpills and Former Research Director at NEEW

खाद (Compost)

खाद (Compost)

खाद का मतलब है कि :- पौधों के अवशेषों का (सड़ना और क्षय), पशुओं की खाद, और नियंत्रित परिस्थितियों में रसोई के कूड़े का जैविक अपघटन होना  है। एक बार जब सारी सामग्रियां पूरी तरह से सड़ जाती है, तो अंत में बचे हुए उत्पाद को खाद कहा जाता है। खाद एक कार्बनिक पदार्थ है।

compost

पाइल या हीप कम्पोस्टिंग:-

1. एक अर्द्ब छायांकित 3 फीट x 3 फीट क्षेत्र (90 सेमी x 90 सेमी)

2. खाद सामग्री।

       1) हरी सामग्री जिसमें नाइट्रोजन समृद्ध मात्रा में उलब्ध होता है (ताजी  कटी घास, टहनियाँ, शाखाएँ  और छाल जो छोटे टुकड़ों मे कटे हों, रसोई  का कूड़ा, खेत पशु खाद)

      2) भूरे रंग की सामग्री जिसमें कार्बन   समृद्ध मात्रा में उलब्ध होता है (सूखे पत्ते, पुआल, कॉर्नस्टॉक और अन्य सूखे पौधों के अवशेष, और पुराने समाचार पत्रों के कटे हुए टुकड़े।

     3) बगीचे की मिट्टी।

     4) पानी।

3. बगीचे का कांटा या फावड़ा

बनाने की विधि :-

1. मिट्टी की सतह पर भूरे रंग की सामग्री कई इंच मोटी (लगभग 6 इंच; 15 सेमी) एक परत फैलाएं। यह पहली परत होती है।

2. अगली परत, हरी सामग्री की, लगभग 6 इंच मोटी (15 सेमी) जोड़ें।

3. इसके ऊपर बगीचे की मिट्टी की पतली परत रखें।

4. परतों को नम बनाने के लिए पर्याप्त पानी छिड़के लेकिन भिगोए या गीला नहीं करें।

5. चरण 1 – 4 को दोहराएं , जब तक कि आपका ढेर 3 फीट (90 सेमी) की ऊंचाई तक न पहुंच जाए।

6. ढेर को गर्म करने के लिए 2 सप्ताह के बाद चालू करें। ढेर को उलटने के लिए बगीचे का कांटा या फावड़ा का प्रयोग करें। मिश्रण को मिश्रित करने के लिए, बीच  की विघटित सामग्री को बाहर और बाहरी की सामग्री को ढेर के केंद की तरफ ले जाएं। उसके बाद आप इसे हर 5-7 दिनों के बाद मिलाते रहें। यदि आपके खाद में बहुत तेज गंध आती है, तो इसे अधिक बार मिलाएं क्योंकिआपका ढेर कसकर पैक किया गया है, ताकि वायुमंडल से खराब न हो सके।

7. सुनिश्चित करें की ढेर गर्म  हो रहा है। जब आप पहली बार ढेर को उपर नीचे, करते हैं, तो  आप इसमे से भाप को निकलते देख सकते हैं। यह संकेतअपघटन का होता है। गर्मी को बनाए रखने के लिए आप ढेर को ढका ही रहने दे सकते हैं।

8. कम्पोस्टिंग प्रकिया शुरू हो जाने के बाद ढेर में कुछ भी नही मिलाएं।

9. जब ढेर गर्म नही हो रहा है, तो इससे पता चलता है कि खाद बनाने की प्रकिया समाप्त हो चुकी है, पृथ्वी पर काले रंग के रुप में मूल सामग्री बच गई है।

पिट कम्पोस्टिंग :-

1. पिट का आकर :-1-1.5 मीटर लंबाई x 1-1.5 मीटर चौड़ाई x 1 मीटर गहराई

2. खाद की सामग्री।

1) हरी सामग्री जिसमें नाइट्रोजन समृद्ध मात्रा में उपस्थित होता है, जैसे :- ताजा कटी हुई घास, टहनियाँ, छाल औरशाखाओं के कटे छोटे टुकड़े,  रसोई का कूड़ा, फार्म पशु खाद।

          2) भूरे रंग की सामग्री जिसमें कार्बन समृद्ध मात्रा में उपस्थित होता है, जैसे:- सूखे पत्ते, पुआल, कॉर्नस्टॉक और अन्य सूखे पौधों के अवशेष, और पुराने समाचार पत्र कटे हुए।

         3) बगीचे की मिट्टी।

         4) लकड़ी की राख।

         5) पानी।

3. लंबी, तेज, नुकीली छड़ी।

4. खेत का उपकरण जैसे ठेला, सींचने का कनस्तर, कुदाल हथियार।

बनाने की विधि :-

1. अर्द्ब छायांकित और गैर-पानी वाले क्षेत्र में कम्पोस्ट पिट को खोदें दें।

2. पहली परत में पौधों की सूखी सामग्री को रखें। यह लगभग 20-25 सेमी मोटी होनी चाहिए। खाद की सामग्री को नम बनाए रखने के लिए उचित मात्रा में पानी छिड़के लेकिन बहुत गीला न करें।

3. अगली परत हरी सामग्री की या ताजी विल्ट घास या खरपतवार से बनी होनी चाहिए। टहनियों और शाखाओं को भी मिलाये जब तक कि उनके छोटे टुकड़ों को तोड़कर काटा नही जाता है। यह परत भी 20- 25 सेमी मोटी होनी चाहिए।

4. पशु की खाद, मिट्टी और राख के मिश्रण को ऊपर रखें। यह परत 10-15 सेमी मोटी होनी चाहिए।

5. चरण 1-3 को दोहराए, जब तक की ढेर 1 मीटर की ऊों चाई तक न पहुँचे। एक गुंबद के आकार का ढेर बनाने के लिए (पक्षों की तुलना में) ढेर को बीच में बनाते हैं। यह ढेर को आसान बनाता है।

6. हवा को विभिन्न परतों में फै लाने के लिए छड़ी को लंबवत रखें।

7. गड्ढे को व्यापक रूप से चौड़े पौधों की पत्तियों से ढके जैसे:- केले के पत्ते, ताड़ की पत्तियाँ आदि।

8. हर दो सप्ताह में ढेर को ऊपर नीचे करें। आप देखेगे की 3-4 महीने के बाद खाद बनकर तैयार हो जाती है।

बेहतर खाद के लिए उपाय:- 

1. ढेर को नम रखें।

2. ढेर को अच्छी तरह से वायुमंडल में रखें।

3. हरे और भूरे रंग की सामग्री का संतुलन बनाए रखें। सामग्री की बहुत अधिक मात्रा अपघटन को धीमा कर देती है। सबसे सही अनुपात 1 भाग हरी सामग्री का और 1 भाग भूरी सामग्री का होता है। इन सामग्रियों के छोटे टुकड़े और कतरन कम्पोस्टिंग प्रकिया की गति को बढ़ाते है और इसके साथ ही ढेर की सतह के क्षेत्र को बढ़ाने में मदद करते है।

4. रोगग्रस्त पौधों, मानव अपशिष्ट, बिल्लियों और कुत्तों के मल को न मिलाए क्योंकि इन अपशिष्ट उत्पादों में पाए जाने वाले हानिकारक रोगजनकों को अपघटन की प्रकिया में नही मारा जा सकता है।

5. परिपक़्व खरबूजे के बीजों को न मिलाए क्योंकि अपघटन की प्रकिया में उनके बीज को ख़त्म नही किया जा सकता हैं, और क्षेत्र में खाद का उपयोग करने के बाद अंकुरित हो सकते हैं।

खाद का उपयोग:- 

1. जैविक पदार्थ का एक उत्कृष्ट स्रोत है, जिसमें बहुत फायदेमंद जीव उपलब्ध होतें हैं।

2. पौधे के विकास के लिए मिट्टी में आवश्यक पोषक तत्वों को जोड़ता है।

3. पौधों की वृद्धि में सुधार होता है।

4. पौधों में रोगजनकों को नियंत्रित करता है।

5. मिट्टी से उत्पन्न रोगजनकों को नियंत्रित करता है।

6. मिट्टी की स्थिति और बनावट में सुधार करता है। यह चिकनी मिटटी को तोड़ता है, और रेतीली मिट्टी की नमी को बरकरार रखने में मदद करता है। इसके साथ संघनन से राहत देता है।

7. मिटटी में जल निकासी में सुधार करता है।

8. मिट्टी के कटाव को कम करता है।

9. उपजाऊ मिट्टी के पुनर्वास में मदद करता है।

10. मिट्टी में खेती करने को आसान बनाता है।

Poonam Singh

Poonam Singh

Poonam Singh, M.Sc.(Bio-Chemistry), Content writer, Self Shiksha, Lcoatips, Candidviews, Quikpills and Former Research Director at NEEW

Banana peels fertiliser

Banana peels fertiliser

Banana peels fertilizer contain nutrients that are essential for healthy potted plants. As they decompose, banana peels add potassium as well as small amounts of nitrogen, phosphorus and magnesium to the soil in a similar fashion as a slow-release fertilizer.

Bananas are rich in both phosphorus and potassium which are important macro-nutrients plants need. All potassium fertilizers are extremely expensive. Banana peels are a natural source of the phosphorus and potassium found in expensive fertilizers, but why buy when making your own banana fertilizer is as easy as tossing the skins.

Preparation method of Banana peel fertilizers

1. Banana Peel Tea

Like compost tea, this fertilizer uses nutrients leeched from banana peels to give your plants a mineral boost.

To make it, fill a mason jar with water, and add a banana peel. Let it sit for 48 hours.

After 2 days, discard the peel, leaving the water in your mason jar

Water your plants as usual with your banana tea.

2. Chop the peels, then add to your garden’s soil directly

If you made the banana peel tea above, you’ll have leftovers to use up. Consider adding them to your garden directly.

Here’s one way to do it:

To do so, chop your banana peels into 1/4 inch pieces – by chopping them, you kick start the composting process, and release some of the beneficial vitamins and minerals in the peels.

Bury them anywhere from 4 inches down to just beneath the surface of the soil.

If you choose to bury them inches below the soil, do so before you plant your vegetables at that location, or where you aren’t in danger of hitting your plants’ roots.

As the peels decompose, all the valuable vitamins in the peels will reach the roots, giving you plants a nutrient bump that will make them happy.

3. Toss leftover banana peels into a compost pile

If you want to feed your red wigglers and indirectly use banana peels in the garden, toss your leftover peels in your compost pile. 

It’s not the most inventive way to use the peels, but it’s a valuable method, nonetheless.

Over time the peels will decompose and turn into rich compost.

When preparing your beds for planting, or when your plants begin to flower, side dress with the compost to aid in fruit and vegetable development – your plants will love the extra nutrients.

4. Dry the peels, then grind them into a fertilizer 

Similar to the spray version, you can dry your banana peels and grind them into a fertilizer. If you only have a few peels to use up, but want to use them effectively on many plants, this is a great option. Once dry, grind the peels in a coffee or spice grinder. 

Add to your garden soil directly, either by sprinkling as a side dressing or gently incorporating into the dirt, making sure to avoid your plants’ roots.

5. Add the whole peel to your garden

A very straight forward way to use banana peels in the garden is to add the whole peel to the soil when planting.

The seeds will get a nutrient kick at the start of their lives, which will translate into healthier plants and a better harvest.

Here’s how to do it:

When you plant your seeds, dig a trench a couple inches deep.

Lay the peels flat in the trench, and add your seeds on top. Fill the trench in when you’re done laying the peels and the seeds.

As the seeds germinate, form roots, and continue to grow, the peels will decompose, creating a rich fertilizer.

6. Create a banana peel spray

A step-up from banana peel tea, this spray is a fertilizer that also uses eggshells for a calcium boost and Epsom salt for magnesium. 

If your plants are established, and you just want to give them a nutrient boost, try making a fertilizer spray.

Why?

Because you can hit many plants at once without needing a ton of banana peels (and without having to chop them all up).

Here’s how to make it:

To create the fertilizer spray, you’ll need banana peels, egg shells, Epsom salt, and water. 

Dry the banana peels and egg shells, then once they’re dry, grind them together. Add the peels and shells to a spray bottle, along with the Epsom salt, and fill the sprayer to the top.

Spray on your plants as needed.

7. Create an insect trap

You can create a simple insect trap with banana peels and apple cider vinegar.

If flies are a problem, and you’re looking for a non-toxic solution that’s pet friendly, creating this trap might be for you. It’s also a great way to reuse a disposable plastic container and keep it out of the landfills.

how to do it:

To make an insect trap using banana peels, combine small pieces of the peels with the vinegar, and shake to mix and release the scent of the banana. 

Drill holes large enough to allow bugs to get through into your plastic container, and pour your banana mixture (peels and all) into the container. 

Place outside in your garden to keep down the insect population (great for gnats). 

8. Keep Aphids Away

One reported use for banana peels in the garden is as an aphid deterrent. These little pests can decimate a garden before you can say “tomato sauce,” so keeping them away is important.

To use banana peels to prevent aphids, place chopped peels just under the soil line. I’m not sure why, but there’s something in the peels that aphids hate.

You’ll also be adding fertilizer to your garden, since as the peels decompose, their nutrients will unlock and release into the dirt.

9. Ferment Peels For Bigger Blooms

For bigger blooms and healthier plants, use fermented banana peels in your garden. This is particularly good for healthy roses, but any flowering plant will benefit. 

How do you ferment banana peels?

Put your peels in a mason jar, and cover with enough water so they’re submerged. You’ll want to put some sort of weight on the peels so they remain under the water. Cover with cloth and rubber band or a loosely fitting top.

Let the mixture sit for a week while the good bacteria does its job and unlocks the nutrients in the peel. If you see a cloudy must, that’s ok. If you start to see black mold, you’ll have to throw it away and start again. 

As long as the peels are below the surface of the water, you’re probably okay. Let your nose and your judgement be your guide.  After a week, put the peels in a blender and puree (save the water for other plants). 

Side dress your blossoming plants with the puree, being sure to incorporate it into the soil gently so it doesn’t attract unwanted critters like squirrels and raccoons.

If they’re a particular concern, dilute the puree in water to help it distribute into the ground better.

10. Create banana peel vinegar (for acidic soil-loving plants)

You’ll also be adding fertilizer to your garden, since as the peels decompose, their nutrients will unlock and release into the dirt.

if you’re looking to give your blueberries a nutritional boost, create some banana vinegar for them – it will give them the acidic soil they crave while unlocking the nutrients in the bananas for a healthier plant.

To create banana vinegar, follow the steps above to ferment the peels.
After a week, remove the peels, and allow the water to sit, covered, until the mixture ferments into a vinegar. This can take anywhere from 4-6 weeks, depending on conditions such as temperature.

Let your nose tell you when it’s turned to vinegar – it will have that unmistakable vinegar scent.

If the mixture seems especially potent (you’ll know by the scent), dilute it with water right before using so you don’t accidentally burn your plants.

How to Dry Banana Peels

You can either dry peels whole, or cut them into strips (1/8″ – 1/4″) and place them so they’re not touching on a cookie sheet.  

For both methods, dry them at 140 degrees, leaving the oven door open 1-2 inches, until they’re dried through.

Poonam Singh

 

Poonam Singh

Poonam Singh

Poonam Singh, M.Sc.(Bio-Chemistry), Content writer, Self Shiksha, Lcoatips, Candidviews, Quikpills and Former Research Director at NEEW

Bio-fungicides

Bio-fungicides

Bio-fungicides are the formulations of living organisms that are used to control the activity of plant pathogenic fungi and bacteria. The concept of bio-fungicides is based on observations of natural processes, where beneficial microorganisms, usually isolated from soil, hinder the activity of plant pathogens. Bio-fungicides are made up of a beneficial fungus and bacteria, which attack pathogenic plants and colonize, causing them to thwart diseases. These microorganisms are usually and naturally found in soil, making them an environmentally friendly alternative to chemical fungicides. Additionally, using bio-fungicides in gardens as an incorporated disease management program reduces the risk of pathogens becoming resistant to chemical fungicides.

How do Bio-fungicides work-

Bio-fungicides control other microorganism in the four following ways:-

1. Through direct competition, bio-fungicides grow a defensive barrier around the root system, or rhizosphere, thereby shielding the roots from harmful attacking fungi.

2. Bio-fungicides also produce a chemical similar to an antibiotic, which is toxic to the invading pathogen. This process is called antibiosis.

3. Bio-fungicides attack and feed harmful pathogens.

4. Bio-fungicides has to be in the rhizosphere either before or at the same time as the pathogen.

5. Predation by the bio-fungicides will not affect the harmful pathogen. If it presents after it has infecting the roots.

6. Bio-fungicides soon start the plant’s immune defense mechanisms enabling it to successfully fight off the invading harmful pathogen.

Uses-

It is important to Know when to use a bio-fungicides. As mentioned above, introduction of fungicides will not “cure” an already infected plant. When using bio-fungicides in the garden, it should be applied before the onset of disease development. Early applications protects the roots against attacking fungai and vigorous development of root hairs. Bio-fungicides should always be used in conjunction with basic cultural control of hygiene, which is the first line of defense for protection from disease.

Poonam Singh

Poonam Singh

Poonam Singh

Poonam Singh, M.Sc.(Bio-Chemistry), Content writer, Self Shiksha, Lcoatips, Candidviews, Quikpills and Former Research Director at NEEW

Soil Conditioners

Soil Conditioners

Soil conditioners are substances produced from organic or non-organic matter. When the conditioner is incorporated into and mixed with your garden soil. So it improves the soil properties, and adds slow releasing  nutrients.

It is usually used for various types of horticulture projects. Weed seeds are naturally finished with this extracted material. Over time, the soil tends becomes compacted, which is bad for plants. Compacted soil can  negative effect on the root growth. Along with this, decrease the ability of plant’s to take up nutrients and water. Soil conditioners can add more loft and texture to keep the soil loose. Soil conditioner can come in many forms like cow manure, peat moss, EM1 and organic compost just to name a few. They can be applied in many ways to your garden. Some conditioners are applied after planting while others may be  worked and  put into the soil before the planting begins.

Generally it is added to improve soil properties and for fertility. Soil conditioners are involved in both natural and synthetic varieties. In addition, individual materials can be used as soil conditioners, because of their ability to improves the quality of soil.

The soil conditioner can be applied to soil using several different method and in varying numbers of applications.

Benefits of Soil Conditioner-

1. Adding the soil conditioner to your garden helps improves moisture retention.

2. It makes water easily accessible for the roots of all your plants.

3. cores soil does not retain water well.

4. The conditioner helps in binding together soil particles into porous granules.

5. It allows air and water to move through the soil.

6. Organic matter in soil conditioner retains moisture.

7. It is able to absorb and store nutrients more easily.

8. Soil conditioners increase the nutrient retention by collecting the nutrients scaping away from the roots, especially in soils that are sandy.

9. The organic matter is food for micro-organisms and other forms of life found in soil.

Poonam Singh

Poonam Singh

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Poonam Singh, M.Sc.(Bio-Chemistry), Content writer, Self Shiksha, Lcoatips, Candidviews, Quikpills and Former Research Director at NEEW

Biostimulant- Improvement of seed and increase in crop yields

Biostimulant- Improvement of seed and increase in crop yields

Biostimulant are made up of various types of biological materials, microorganisms and compounds that can be applied directly to plants,  Those who can improve the plants  seeds or soil to improve a plant’s vigor, increase crop yield and relieve stress of plants. The use of biostimulants can start in the seed germination phase and continue throughout the plant’s entire life cycle.

Biostimulants work to increase the plant’s ability to absorbing nutrients so  it can develop properly. when applied to soil, biostimulants improve the  soil,s supplementary micro-organisms that help a plant,s  roots grow and form a beneficial Symbiotic relationship. Biostimulants can promote the development of roots and distribution of nutrients by promoting soil supplement microorganisms and improving metabolic efficiency:

  • Increase yield in terms of weight, seed and fruit set.
  • Enhance quantity, affecting sugar content, colour and shelf life.
  • Improve the efficiency of water usage.
  • strengthens stress tolerance and recovery.

Benefits of biostimultants: –

1. Biostimulants help in combating the effects of enviromental stresses

  • Biostimulants promote the growth of germination and root.
  • There is resistance to increasing strength and more stress.
  • An enhanced root system promotes more efficient nutrients, elevation and water uptake and translocation throughout the growing season.

2. Biostimulants encourage plant growth.

Promoting growth and improvement plant’s  metabolism can benefit in overall plant growth and health. Apart from this, providing a catalyst at  specific developmental phases can lead to increased yield, improved uniformity and quality of the overall crop.

3. Biostimulants encourage the growth of plants.

  • Biostimants usually work through different mechanisms compared to standard fertilizers.
  • Encouraging plant growth, provide essential nutrients for plant metabolism.
  • These metabolism pathways upregulate gene expression, which influence cell division and sizing, root, shoot growth, reproduction development and timing.

 

Poonam Singh

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Poonam Singh, M.Sc.(Bio-Chemistry), Content writer, Self Shiksha, Lcoatips, Candidviews, Quikpills and Former Research Director at NEEW

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